Posts

अरण्यक

आज के ज़माने में अरण्यक बहुत ही प्राचीन सा नाम लगता है किन्तु वह नाम उसके लिए एकदम उपयुक्त था। उसके लिए ही क्यों, यह नाम मेरे, आपके और सभी के लिए उपयुक्त है। आज नहीं तो कल, हम सभी अरण्यक होंगे। लगभग तीस वर्ष पूर्व पूर्णिमा की एक रात को मैं छत पर टहल रहा था। बहती गंगा में पूर्ण चन्द्रमा का प्रतिबिम्ब ऐसा दिखाई पड़ रहा था, मानो कोई सफ़ेद कपड़ा किसी कंटीली झाडी में फँस कर रह गया है, और लहरों का पूरा ज़ोर भी उसे अपने साथ बहा ले जाने में अक्षम है। गंगा के पीछे, शिवालिक के घने जंगलों में, मंद-मंद बयार से पेड़ों के पत्तों के हिलने के अलावा और कोई ख़ास हलचल नहीं थी। अपने ही ख़्यालों में खोया हुआ मैं, चन्द्रमा के उस प्रतिबिम्ब को बड़ी देर से निहार रहा था कि अचानक मेरा ध्यान भंग हुआ। ऐसा लगा कि किसी जंगली जानवर ने उस पार से नदी में एक छलांग लगाई हो। चन्द्रमा के उस प्रतिबिम्ब पर मानो एक क्षणिक ग्रहण सा लगा,और तुरंत हट भी गया। मुझे आभास हो गया कि वह जो भी था, एक लम्बी छलांग में, नदी को पार कर, मेरे घर के पिछले आँगन में घुस चुका था। बिना देर किये मैं छत से नीचे उतर आया और दीवार पर सालों से टंग

वीर बालिका नीरजा - भाग २

पहला भाग :  वीर बालिका नीरजा - भाग १ नीरजा: " जी दादाजी। मेरी योग्यता पर  किंचित संदेह किंचित=Slightest, संदेह=Doubt  न कीजिये। आप केवल मुझे यह बताइए की जाना कहाँ है?" वृक्ष: " ठीक है!   तो ध्यान से सुनो!  यहां से   कुछ पंद्रह सौ  कोस दूर उत्तर दिशा  में, हिमालय के  पार, पामिर पर्वतों से घिरा हुआ का राकुल सरोवर है।  उस सरोवर Lake का जल उसमें विचरण करने वाले जलजीवों  के कारण गहरा  काला हो गया  है। किसी तरह तुम्हें उस सरोवर के तल से  एक काला मोती प्राप्त करना होगा।  उस मोती को पीस कर, उसके चूरे  को तुम्हारे नाना द्वारा बनाई गयी  औषधि में मिला कर छोटी राजकुमारी को पिलाने से ही वह ठीक हो पाएगी। " अपने परदादा से काराकुल तक पहुँचने  की सारी  जानकारी प्राप्त कर और  उनका आशीर्वाद  लेकर वह  अकेले ही उस काले मोती की खोज में निकल पड़ी। दो दिनों तक अपने घोड़े पर सवार कई छोटी-बड़ी नदियों और पर्वतों को पार कर राजकुमारी ने  एक घने जंगल में प्रवेश किया। अपनी थकान की तो  राजकुमारी को इतनी चिंता न थी किन्तु घोड़े को भी विश्राम देना आवश्यक था। अतः नीरजा ने सुबह तक उसी वन म

वीर बालिका नीरजा - भाग १

प्राचीन काल में, सुख और समृद्धि से परिपूर्ण, नलगंदल नाम का एक राज्य था। वहां के राजा, महाराज ऋत्विक एक कुशल प्रशासक थे, और उनके राज्यकाल में प्रजा अत्यंत सुखी थी। अपनी पत्नी महारानी स्वर्णलता, व दो पुत्रियों नीरजा एवं रागेश्वरी के साथ वे आनंदपूर्वक जीवन व्यतीत कर रहे थे। एक वर्ष नलगंदल में एक अज्ञात संक्रमण अज्ञात=Unknown, संक्रमण=Infection का प्रकोप हुआ, और छोटी राजकुमारी रागेश्वरी, जो उस समय केवल दो वर्ष की थी, उस संक्रमण के कारण अचेतन अवस्था अचेतन=Unconscious, अवस्था=State में चली गयी। उस समय महाराज ऋत्विक, राज्यहित में व्यापार को विस्तृत Expand करने हेतु, दक्षिण अफ्रीका के राजा ओडुम्बे से मिलने वहां गए हुए थे। पंद्रह दिवस बीत गए, परन्तु राजवैद्य धन्वन्तरी राजकुमारी को उस अवस्था से नहीं निकाल पाए। अतः महारानी स्वर्णलता ने अपने पिता, फौन्देश के राजा सुयश को बुला भेजा। सेनापति विराग सन्देश लेकर फौन्देश पहुंचे और महाराज सुयश को अपने साथ ले आए। महाराज स्वयं एक प्रतिष्ठित Reputed वैद्य थे। राजकुमारी की अवस्था देख उन्होनें तुरंत सेनापति विराग के नेतृत्व Leadership में, दस सिपाह

Inception

I am half asleep while Neha and Snigdha are looking into their cellphones, discussing something and giggling intermittently. Suddenly I hear my father's voice from the living room. The main door opens and I can hear few people coming in. My father says "Kailash ji, aap aa gaye!" Oh, you are here Mr. Kailash! Then I hear few more faint voices saying multiple things out of which I remember "chalo achha hua", "theek ho gaye" Wow! You look alright now! . This is strange as my parents are not with me at this time of year. I, frightened and shocked, run to the living room but there is nobody. Apparently, Neha too heard the voices and ran outside after me. We both are shocked and surprised. Then I realize that I am actually frozen and not moving at all. I realize that it is a dream and I try to come out of it. I am awake after some struggle. I, still lying on my stomach, look to my left and find Neha sleeping. I try to wake her up. She opens her eyes and

I wish..

If I were a pond of muddy water, And you were a drop of rain; I wish that you, Of all the drops would fall upon me every time the life would rain. And create inside me these ripples of life, piercing through the dirt that has confined me, in its endless darkness.

Falling in love is so hard on the knees...

"I Love You" - These are the most beautiful words I have ever heard. "I Love You"- These are the most difficult words to say to a person who you love. So what is LOVE? The definitions above never satisfied me and I am still confused. And so for me Love is the most confusing phenomenon in this universe. One of my friends gave his heart to this beauti ful girl who is a good friend of his. But he can never tell it to her, because of the fear that he may lose her. What if she denies? Oh the same filmi drama...! He says, "Yaar usne mana kiya to main to mar jaunga." And I say "Are bhaiyya pyar karne ko maine kaha tha kya." There are so many one sided love stories in this world which are going to end like that of my friend when that girl is gonna get married to someone she doesn't even know or when his parents will find a 'gaon ki gori' for him and he will marry her and lead a happily married life. But what about the love that he has no

The Darkness, I hope it ends...

The smoke is heavy and the darkness has encumbered all my thoughts.  The unconscious is all over and is creeping through the dark.  The shadow is larger than the self and its not easy to see the other side.  The hell has come alive and we all are a part of it, unrelated though.  I am helpless because the key to the exit is with someone else who had forgotten where he kept it.  I hope he remembers and unlock the exits from hell that we create and live in...